आधुनिक रोगों की चिकित्सा में संगीत की भूमिका

श्रीमद् भगवत् में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है

नाहंवासमिबेकुण्ठे, योगिनांहृदय च।

मद् भदा यत्र गायन्ति, तत्र तिष्ठामिनारद।।

        संगीत परमात्मा का निवास स्थान है। संगीत परमात्मा प्राप्ति का मोक्ष प्राप्ति का साधन है।

डनेपब पे जीम उमकपबपदम िइतवामद ीमंतज

        आत्मा के लिए संगीत उसी प्रकार आवश्यक है, जिस प्रकार शरीर के लिए व्यायाम।

        रामहरेसबरोगकोकायरको दे सूर।

        सूखियाकोसाधनबनेदुखियाकादुःख दूर।।

        वर्तमान समय में अनेकों चिकित्सा पद्धतियांप्रचलित हैंजैसेएलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेद, चुम्बकीय चिकित्सारोगआदि ऐसे में संगीत चिकित्सा वर्तमान समय में काफी उभर कर सामने रही है, जिसका प्रयोग अबअस्पतालों एवं योग केन्द्रों में किया जा रहा है।

        कई लोगों काविश्वास है कि कोई भी संगीत जिस पर आप प्रतिक्रिया करते हैं वह आपके लिए कार्य करेगा। डा0 चुहाअपने Counselling Session में अपने मरीज को उसकी पसन्द का गाना सुनने का अवसर देते हैं, जबकि आशीष खोकर कहते हैंसबसे ज्यादा जरूरी है कि कितनी एकाग्रता से आपने संगीत सुना है।

        आजकल एक नई चिकित्सा प्रणाली का प्रयोग चल रहा है, जिसे शरीरऔर मनचिकित्साशास्त्र अर्थात् ‘Body Mind Medicine’ श्कहा गया है।इस चिकित्सा शास्त्र का उद्देश्य है मानवतथातनावजन्य रोगों पर नियंत्रण करना। इसप्रकार की चिकित्सामें ‘संगीत‘ का महत्वपूर्ण स्थान है।मानसिक तनाव से उत्पन्न होने वाली शारीरिक व्याधियों के लिए शोधकर्ता भिन्न-भिन्न मानसिक विकारों को भिन्न-भिन्न व्याधियों के लिये उत्तरदायी मानते हैं। दैनिक समाचार The Times of India  में प्रकाशित लेख ‘Body Mind Medicine is a new mantra to good health’ की लेखिका वंदना रामनानी के अनुसार- also show that commotion like fear and anxiety are associated with high blood pressure, anger and jealously with heart and paralysis, greed and possessiveness with obsity and diabetes अर्थात् शोधों से यह दर्शाया गया है कि डर तथा चिंता जैसे भाव उच्च रक्तचाप से जुड़े रहते हैं। गुस्सा तथा जलन, हृदयघात से लकवा लालच जैसे अधिकतर सम्बन्ध मोटापे से मधुमेह से। डाॅ0 पोडोलस्की ने लिखा है कि – Music by arousing pleasurable emotions promotes the flow of didestive juice. This increased flow causes a more through digestion.

        अर्थात् संगीत अनान्दात्मक भावों को जागृत कर पाचक रसों के बहाव व बढ़ाता है। यह बढ़ा हुआ बहाव अधिक सम्पूर्ण पाचन करता है।

        आधुनिक युग में संगीत द्वारा चिकित्सा के अन्य प्रयोग सबसे ज्यादा पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने किये।जैसे-इटली के राजा का अनिद्रा का रोगदूर किया, शेरसंगीत के द्वारा शान्तवश में किया आदि।

        डाॅ0 सलीम शेख जो कि कोठारी हास्पिटल, मुम्बई में कन्सलटिंग साकोलाॅजिस्ट है एवं इनका स्वयं का क्लीनिक ‘सक्सेसमोटीवेशनसेन्ट‘ जोकिताड़ेदवग्रांटरोड, मुम्बईमेंस्थितहै, जिसकानामहै, ‘‘ माइण्डपावरम्यूजिक‘‘ इनके अनुसार इस के श्रवण करने से दिमागी शाक्ति में वृद्धि होती है।

        गाॅंव करला जो कि लोनावाला के पास स्थित है के निवासी डाॅ0 बालाजी ताॅबे ने रोगियों को सुधारने हेतु एक हीलींग की रचना की है।समाचार पत्र पांवजन्य में प्रकाशित साक्षत्कार में पं0 जसराज जी के अनुसार सन् 1976 मेंउन्होनें टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट में एक मरणासन्न बालक को एक घंण्टा संगीत सुनाकर चलने लायक कर दिया था वह बालक एक महीना 10 दिन जीवित रहा।

        आधुनिक समय में संगत द्वारा रोगों का उपचार करना निरन्तर बढ़ता जा रहा है, क्यांेकि विभिन्न रोगों एंव तालों तथा नृत्य रोगों का शमन किया जा सकता है-

1.      सभी प्रकार के ज्वर, टाइफाइड इत्यादि-रामहिण्डोला, मारवापूरिया।

2.      क्षय रोगतिलवाड़ा, झूमरा एकतल (विलम्बित)

3.      रक्त शुद्धिरागआसावरी

4.      रक्ताचापनियंत्रणरागपूर्वीतोड़ीमल्तानी

5.      रक्ताल्पता (खून की कमी)-राग पूरिया

6.      दमासर्दी, मस्तिरूक की निष्क्रियतारागभैरवी

7.      मिर्गी, अनिद्रा, पागलपन, हिस्टीरियातालचारताल धमार, सूलताल

8.      मानसिकरोगरागललितकेदार

9.      चर्मरोग-राग-मेघमल्हार मुल्तानी, मधुवन्ती इत्यादि

10.     मधुमेहरागजौनपुरीजैजैवन्ती 

        संगीत चिकित्सा के कुछ आधार हैजो अपने निम्न कारणों से व्यक्ति विशेष के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है।

(1)     प्रेरक शक्ति-संगीतमें एकप्रकार की शक्ति होती है इसके द्वारा व्यक्ति अत्यधिक उत्तेजित होता है।

(2)     ध्वनि कम्पन-सम्पूर्ण मंत्रोचारण में ध्वनि का ही महत्व होता है। शब्द विशेष के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि कम्पन, व्यक्ति के मस्तिष्क पर ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करते हैं।

(3)     मस्तिष्क की तरंगे-संगीत में अल्फा तरंगे विश्राम तथा ऊँची चेतना का घातक होता है। यह मस्तिष्क और स्वास्थ्य दोनों के लिए अत्याधिक लाभदायक है।

        इसके अतिरिक्त संगीत चिकित्सा करते समय व्यक्ति को टी0साई राम के दस बिन्दु आवश्य बताने चाहिए:-

1.      संगीत दृश्य सेसुनिये, दिमागसेनहीं।

2.      आनन्द लीजिये, विश्लेषण मत कीजिये।

3.      एक दिनमें 4 बार या 15 मिनट का अच्छा तथ अपने मनोकूल संगीत सुनिये।

4.      संगीत के साथ ड्राइविंग, खाना, नहाना, खाना बनाना अधिक आन्नद दायी बनाएं।

5.      खाली पेट संगीत मत सुनिये।

6.      वास्तव में गाना या कोई वाद्य बजाना धैर्य पूर्वक सुनने से अच्छा है।

7.      कोई संगीत वाद्य बजाना सीखिये।

8.      बच्चों कोसंगीत सुनने की आदत डालिये।

9.      बीमार व्यक्ति के पास हमेशा सौम्य, मधुर और चित्त प्रसन्न करने वाला संगीत बजाइये।

10.     अच्छे संगीत का संग्रह घर पर रखिये।

        संगीतिक चिकित्सा को कोई भी साइडइफेक्ट नहीं है। यह मानव को शरीरिक रूप से स्वस्थ करने के साथ मानसिक रूप से स्वस्थ करती है।

        अतः हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते है कि संगीताचिकित्सा की भूमिका रोगोपचार का पूर्ण रूप से सकल एवं विकसित माध्यम है। शर्त यह है कि रोगी को संगीतमंे रूचि एवं आस्था हो।

        सबसे महत्वूपर्ण बात हमें समझ लेना अतिआवश्यक होगा कि संगीत को किस राग या ताल की मधुर ध्वनि से उसको नियंत्रित किया जा सकता है।वही उसको सूनना चाहिए ताकि वह तनाव रहित हो सकें। यही संगीत चिकित्सा की भूमिका का मूल सिद्धांत है।

(मंजू मलकानी)

प्रशिक्षक, कथकनृत्य

भातखण्डेसंगीतसंस्थान

अभिमतविश्वविद्यालय, लखनऊ

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